न ही कुछ नौकरी सोची,न ही कुछ प्यार अभी सोचा.../ मुक्तक (विधाता छंद)


मुक्तक ( विधाता छंद)
मापनी : १२२२ १२२२ १२२२ १२२२

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न ही हमने कभी सोचा, न ही तुमने कभी सोचा।
किया था प्यार बस हमने, नहीं कुछ भी तभी सोचा।।
गुजरता ही गया सब वक्त इश्क़ सबर नहीं देखा।
न ही कुछ नौकरी सोची,न ही कुछ प्यार अभी सोचा।।
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~ वैधविक

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